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PRESS RELEASE
Ref. No:  Date: 25-09-2020
Domestic Systemically Important Insurers (D-SIIs)

प्रेस विज्ञप्ति

PRESS RELEASE

 

घरेलु प्रणालीबद्ध महत्वपूर्ण बीमाकर्ता (डी-एसआईआईएस)

Domestic Systemically Important Insurers (D-SIIs)

 

24 सितम्बर, 2020 / 24th September, 2020

 

1.   घरेलु प्रणालीबद्ध महत्वपूर्ण बीमाकर्ताओं (डी-एसआईआई) का आशय ऐसे आकार, बाजार महत्वपूर्ण और घरेलु और वैश्‍विक परस्पर संबंध के बीमाकर्ताओं से है जिनके संकट या विफलता से घरेलु वित्तीय प्रणाली में एक महत्वूपूर्ण अव्यवस्था उत्पन्न हो सकती है। अतः राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बीमा सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता के लिए डी-एसआईआई का निरंतर रूप से कार्य करना महत्वपूर्ण हैं।

Domestic Systemically Important Insurers (D-SIIs) refer to insurers of such size, market importance and domestic and global inter connectedness whose distress or failure would cause a significant dislocation in the domestic financial system. Therefore, the continued functioning of D-SIIs is critical for the uninterrupted availability of insurance services to the national economy.

 

2.   डी-एसआईआई को ऐसे बीमाकर्ता के रूप में माना जाता है जो बहुत बड़ी होती है अथवा विफल होने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है ’(टीबीटीएफ)। यह धारणा और सरकारी समर्थन की कथित अपेक्षा जोखिम को बढ़ा सकती है, जो बाजार अनुशासन को कम कर सकती है, प्रतिस्पर्धी विकृतियां पैदा कर सकती है और भविष्य में संकट की संभावना को बढ़ा सकती है। इन विचारों के लिए आवश्यक होगा कि डीएसआईआई को प्रणालीबद्ध जोखिमों और नैतिक जोखिम मामलों से निपटने के लिए अतिरिक्त विनियामक उपायों के अधीन रखा जाना चाहिए।

D-SIIs are perceived as insurers that are ‘too big or too important to fail’ (TBTF). This perception and the perceived expectation of government support may amplify risk taking, reduce market discipline, create competitive distortions, and increase the possibility of distress in future. These considerations require that D-SIIs should be subjected to additional regulatory measures to deal with the systemic risks and moral hazard issues.

 

3.     ऐसे बीमाकर्ताओं की पहचान करने और ऐसे बीमाकर्ताओं को निगरानी तंत्र में वृद्धि करने के लिए, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने डी-एसआईआई की पहचान और पर्यवेक्षण के लिए एक पद्धति विकसित की है। डी-एसआईआई की पहचान हेतु कार्यप्रणाली के अनुसार, मानदंडों में, अन्य बातों के साथ निम्नलिखित शामिल है:

In order to identify such insurers and to put such insurers to enhanced monitoring mechanism, the Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) has developed a methodology for identification and supervision of D-SIIs. The parameters, as per the methodology for identification of D-SIIs, inter alia include the following:

क. कुल राजस्व के संबंध में परिचालन का आकार सहित बीमा कराए हुए का प्रीमियम और प्रबंधन के तहत संपत्ति का मूल्य

a.      the size of operations in terms of total revenue, including premium underwritten and the value of assets under management;

 

ख. एक से अधिक क्षेत्राधिकार में वैश्विक गतिविधियाँ

b.    global activities across more than one jurisdiction;

 

ग. उनके उत्पादों और/अथवा परिचालनों में प्रतिस्थापन की कमी; तथा

c.     lack of substitutability of their products and/or operations; and

 

घ. प्रतिपक्ष निवेश और मैक्रो-आर्थिक निवेश के माध्यम से परस्पर संबंध।

d.    interconnectedness through counterparty exposure and macro-economic exposure.

 

इन मापदंडों को उनके संचालन के विभिन्न पहलुओं को कवर करने लिए महत्व दिया गया है। प्राधिकरण वार्षिक आधार पर डी-एसआईआई की पहचान करेगी और इन बीमाकर्ताओं के नाम सार्वजनिक सूचना के लिए घोषित करेगी।

These parameters were assigned weights to cover various aspects of their operations. The Authority would identify D-SIIs on an annual basis and disclose the names of these insurers for public information.

 

4.    डाटा के विश्लेषण के बाद, प्राधिकरण ने वर्ष 2020-21 हेतु निम्‍नलिखित बीमाकर्ताओं को डी-एसआईआई के रूप में पहचान किया है:

 After analysis of data, the Authority has identified for the year 2020-21, the following insurers as D-SIIs:

 

.    भारतीय जीवन बीमा निगम

a. Life Insurance Corporation of India;

ख. भारतीय साधारण बीमा निगम और

b.    General Insurance Corporation of India; and

ग. द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि.

c.     The New India Assurance Co. Ltd.

 

5.       उनके संचालन की प्रकृति और डी-एसआईआई के प्रणालीगत महत्व को देखते हुए, इन बीमाकर्ताओं को निम्नलिखित कार्य करने को कहा गया है।

Given the nature of their operations and the systemic importance of the D-SIIs, these insurers have been asked to carry out the following:

 

(i)   कॉरपोरेट गवर्नेंस के स्तर को बढ़ाएं।  

Raise the level of corporate governance;

(ii)  सभी प्रासंगिक जोखिम की पहचान करें और मजबूत जोखिम प्रबंधन संस्कृति का संवर्धन करें।

identify all relevant risk and promote a sound risk management culture.

 

6.      डी-एसआईआई भी संवर्धित विनियामक पर्यवेक्षण के अधीन किया जाएगा।

 D-SIIs will also be subjected to enhanced regulatory supervision.

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